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Excerpt for विश्व के त्योहार by , available in its entirety at Smashwords









प्रकाशक


वर्जिन साहित्यपीठ

78, अजय पार्क, गली नंबर 7, नया बाजार,

नजफगढ़, नयी दिल्ली 110043








सर्वाधिकार सुरक्षित

प्रथम संस्करण - मार्च 2018

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कॉपीराइट © 2018

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विश्व के त्योहार


(काव्य संग्रह)










लेखक

योगेश कुमार







वर्जिन साहित्यपीठ





योगेश कुमार



मैं पेशे से सीनियर कंटेंट राइटर हूँ

मैंने गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से

मॉस कम्युनिकेशन में एम्. . किया है

मुझे कविताएँ व लेख लिखने में खास रूचि है

मैं पिछले १० सालों से अध्यात्म, खेल आदि पर

कविताएँ एवं लेख लिख रहा हूँ











































सच्ची नवरात्रि


फागुन की समाप्ति पश्चात, आई नव वर्ष की वेला
हर और लगा चैत्र नवरात्रों पर शिव शक्तियों का मेला।



2075 विक्रम सम्वत का हुआ भव्य शानदार आगमन
शिव के ज्ञान योग से सुसज्जित शिव शक्तियों को नमन।



पुनर्जन्म में आते-आते जब आत्मा में होने लगते विकार व्याप्त,
सर्वशक्तिवान शिव का होता अवतरण करने विकारों को समाप्त।



वृद्ध ब्रह्मा के तन में कर प्रवेश, निराकार शिव रचते ब्राह्मण धर्म
ज्ञान कलश माताओं-बहनों को सौंप, सिखाते करना श्रेष्ठ कर्म।



शिव शक्तियों से ही भक्त-जन माँगते, ज्ञान बल और बुद्धि,
ज्ञान वीणा द्वारा वही शक्तिस्वरूपा सरस्वती, करती सम्पूर्ण शुद्धि।



शिव पर मर मिटने वाली सच्ची पार्वती कहलाती माँ शैलपुत्री मनभावनी,
वही बाल ब्रह्मचारिणी करके शिव की तपस्या कहलाती माँ ब्रह्मचारिणी।



शिव की ज्ञान ऊष्मा द्वारा सतयुगी सृष्टि की रचता है माँ कुष्मांडा,
स्कन्द (कार्तिक) को गोद में लिए, कमलासिनी शक्ति दाता है स्कन्द माता।



शक्तिस्वरूपा, मधुरता दायिनी, कष्टनिवारिणी है कात्यायिनी माँ
त्रिनेत्री, रौद्र रूपिणी, बुरी शक्तियों से बचाने वाली कालरात्रि माँ।



शिव की गहन तपस्या द्वारा कंचन काया प्राप्त करने वाली महागौरी माँ
कमल, गदा, चक्र व शास्त्र-धारिणी सिद्धिधात्री करती पूर्ण सर्व मनोकामना।



शिव जैसा दिव्य गुणधारी पूज्य देवता बनाने वाला परमपिता और कहाँ
शिव शक्तियों समान सर्वगुण संपन्न बनकर, शिव संग बनायें सतयुगी जहां।













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प्रेमियों के इस पर्व में छुपा है सच्चा रूहानी प्यार.
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