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वर्जिन साहित्यपीठ
78, अजय पार्क, गली नंबर 7, नया बाजार,
नजफगढ़, नयी दिल्ली 110043





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प्रथम संस्करण - अप्रैल 2018
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ललका गुलाब
(भोजपुरी काव्य संग्रह)






कवि
गणेश नाथ तिवारीश्रीकरपुरी











गणेश नाथ तिवारीश्रीकरपुरी

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वाट्सप, इमो
966 569460230
सऊदी अरब


बाबूजी

स्वo बिजय कुमार तिवारी

माई

बिजयलक्ष्मी तिवारी


जन्मतिथि

19/07/1987

गाँव

अउरी डाकघर श्रीकरपुर, थाना गुठनी, जिला सिवान
बिहार 8414365



हम स्नातक स्वामी देवानंद डिग्री कॉलेज लार देवरिया से हिंदी, समाजशास्त्र से कइले बानी। गोपालगंज के महाकवि राधामोहन चौबे "अंजन जी" से 2014 में मिलनी त भोजपुरी लिखे पढ़े में रूचि बढ़ल आ गोपालगंज के मुशहरी से "सुभाष पाण्डेय" गुरु जी" से मिल के भोजपुरी लिखे के प्रेरणा मिलल, अउरी जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया परिवार के बहुत प्यार-दुलार मिलेला ।
वर्तमान में हम सऊदी अरब में मेकेनिकल टेक्नीशियन के नोकरी करतानी।




भोजपुरी के हमहू हई, आन बान शान,
रहवइया हई बिहार के,
जहा रही उहा झार के,

जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया










बेटी बचाई बेटी पढाई


माई की जिनिगी के सांस हई बेटी,
बिपती में अन्हरो के आस हई बेटी,
बेटी के रउरा संस्कार सिखलाई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।

एहीसे घर के धड़कन होले बेटी,
होखे नसीब उहें जनमेली बेटी,
बेटी से आपन सब सपना सजाई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।

ममता के साँचो मूरत होले बेटी,
साँचो के सबसे खूबसूरत होले बेटी,
बेटिये बहिन होले बेटिये ह माई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।

अँगना लगावल तुलसी होले बेटी,
मन्दिर का ऊपर कलसी होले बेटी,
बेटिये बहुरिया बनि घरवा सजाई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।

बेटिये तs मान बेटी सम्मान होले,
बेटिये सबका घरके जान प्रान होले,
रहे चाहे नइहर भा ससुरा में जाई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।

ना बुझाइल कवन कसूर बा हमार,
हमरा के काहे देलs कोखिए में मार,
बेटीमार के समाज से करीं छटाई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।

करीं ना बेटी पर बस एतने एहसान,
एकरा देहिया में डाल दीं तनकी परान,
एकरे से होई आगे खानदान के बड़ाई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।

चारु ओर बेटा के होत गुणगान बा,
"गणेश" में बसल सभकर परान बा ,
इहे सम्मान अब बेटिओ के दियाई,
बेटी बचाई आ बेटी पढ़ाई।।





















विधाता


होखही के रहे जब हमरे से रेप ए दादा ,
काहे के बनवले हमके बेटी ए बिधाता।।

रोवत रोवत हमरो झुरा गइल गटई,
तबो नाही छोडलस हमरा के निर्दयी,
काँचे उमरिया जइसे कुछ्वु ना बुझाता,
काहे के बनवले हमके बेटी ए बिधाता।।

हिन्दू मुसलमान के देहलन स रंगवा,
लसिया के ऊपर पड़ल रंगवा के भंगवा
रेपवो पर राजनीति के रोटियां सेकाता,
काहे के बनवले हमके बेटी ए बिधाता।।

सुनी भगवान रउरा सद्बुद्धि बढाई,
बेटियन के लाज अब रउरे बचाई,
कहत गणेश अब मनवा लजाता,
काहे के बनवले हमके बेटी ए बिधाता।।

होखही के रहे जब हमरे से रेप ए दादा,
काहे के बनवले हमके बेटी ए बिधाता।।








रात होइ

*जे जागी से पाई जे सूति उ खोई*
*भागि में होइ तs फेरु रात होइ*

उठ उठ मोर बलमुआ विहान भइल हो,
चिरईयन के चारू ओर चीचिहान भइल हो,
बाति मान समइया सगरो जियान होइ हो,
भागि में होइ तs फेरु रात होइ हो।।

खेती करे चलले गाँव के किसनवा,
पान खाये लागल शहरी बयमनवा,
रतिया फेरु से कहियो जवान होइ हो,
भागि में होइ तs फेरु रात होइ हो।।

घरवा के ओरिया अइली किरिनिया,
पूजा करे गइली रउरे बहिनिया,
आजु चान के अँजोरिया सयान होई हो,
भागि में होइ तs फेरु रात होइ हो।।










ललका गुलाब

तू तs ललका गुलाब लागतारु,
चमकत अँजोरिया रात लागतारू,

चारु ओर तू ही लउकत बाड़ू,
नेह छोह से भरल किताब लागतारु,

चान के चाननी नीयन सवरल,
कोयल के आवाज लागतारु,

चलेलु रहता धs के पोखरा की ओर,
पाँव के पायल अस झनकार लागतारु,

बिना पियले गोड़ डगमगात बा,
तू तs पुरनका शराब लागतारु,

रात कर फेरत रह गइल,
तू तs जिनगी के ख्वाब लागतारु,

डूबत सुरुज के ललकी किरिन नीयन,
परदेसी गणेश के सुझाव लागतारु।।







सरगही

हम जदि रउआ से कुछ कहे चाहतानी त मत खिसियाईब,
आज हमार व्रत बा चुपचाप रहब हल्ला मत मचाऐब,

बाल बच्चा के सम्हारब अउरी ठीक से खाना खियाईब,
ना होखे त आज छूटी ले ली नोकरी पर मत जाइब,

आज सजाव दही, देसी चिउरा आ चीनी लियाएब,
भिनसारे उठ के लइकन संघे रउरो सरगही खाइब,

हम राउर सगरो बात के हर खबर के हरदम मानीले,
रउरा बसल बानी हमरा दिल मे ई बस हमही जानिले,

मुखरा बन के उभरब रउरा हमरा जिनगी के गीतन में,
अंगूरी में सज रहल कवनो साज़ मत बनब जिनगी मे।।















ख्याली पोलाव


जिनगी के राह में खड़ा बानी जा,
इंतजार तोहरो बा हमरो बा,

मिलि ना पवनी जा अबही ले,
एकर मलाल तोहरो बा हमरो बा,

कमाल कइलू पिरितिया के कसम दे ,
ई दिल बेकरार तोहरो बा हमरो बा,

समय रहते सचेत हो जाये के परी,
खयाली पोलाव तोहरो बा हमरो बा।।














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