include_once("common_lab_header.php");
Excerpt for तूं ते अऊं (डोगरी कविता संग्रैह्) by , available in its entirety at Smashwords



प्रकाशक
वर्जिन साहित्यपीठ
78, अजय पार्क, गली नंबर 7, नया बाजार,
नजफगढ़, नयी दिल्ली 110043

सर्वाधिकार सुरक्षित
प्रथम संस्करण - मई 2018
ISBN


कॉपीराइट © 2018
वर्जिन साहित्यपीठ


कॉपीराइट

इस प्रकाशन में दी गई सामग्री कॉपीराइट के अधीन है। इस प्रकाशन के किसी भी भाग का, किसी भी रूप में, किसी भी माध्यम से - कागज या इलेक्ट्रॉनिक - पुनरुत्पादन, संग्रहण या वितरण तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक वर्जिन साहित्यपीठ द्वारा अधिकृत नहीं किया जाता।





तूं ते अऊं

(डोगरी कविता संग्रैह्)


कवि
यशपाल निर्मल









यशपाल निर्मल

09086118736 yash.dogri@gmail.com

निवास: 524, माता रानी दरबार, नरवाल पाईं, सतवारी, एयरपोर्ट रोड, जम्मू-180003

सम्प्रति: सहायक संपादक, जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकैडमी, जम्मू













डोगरी एवं हिंदी भाषा के युवा लघुकथाकार, कथाकार, कवि, आलोचक, लेखक, अनुवादक, भाषाविद् एवं सांस्कृतिककर्मी यशपाल निर्मल का जन्म 15 अप्रैल 1977 को जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र छंब ज्यौडियां के गांव गड़ी बिशना में श्रीमती कांता शर्मा एवं श्री चमन लाल शर्मा के घर पर हुआ।

आपने जम्मू विश्वविद्यालय से डोगरी भाषा में स्नातकोतर एवं एम.फिल. की उपाधियां प्राप्त की। आपने वर्ष 2005 में जम्मू विश्वविद्यालय से डोगरी भाषा में स्लेट एवं वर्ष 2006 में डोगरी भाषा में यू.जी.सी. की नेट परीक्षा उतीर्ण की। आपको डोगरी, हिन्दी, पंजाबी, उर्दू एवं अंग्रेज़ी भाषाओं का ज्ञान है। आप कई भाषाओं में अनुवाद कार्य कर रहें है। आपने सन् 1996 में एक प्राईवेट स्कूल टीचर के रूप में अपने व्यवसायिक जीवन की शुरुआत की। उसके उपरांत "दैनिक जागरण", "अमर उजाला" एवं "विदर्भ चंडिका" जैसे समाचार पत्रों के साथ बतौर संवाददाता कार्य किया। वर्ष 2007 में आप नार्दन रीजनल लैंग्वेज सैंटर, पंजाबी यूनिवर्सिटी कैंपस,पटियाला में डोगरी भाषा एवं भाषा विज्ञान के शिक्षण हेतु अतिथि ब्याख्याता नियुक्त हुए और तीन वर्षों तक अध्यापन के उपरांत दिसंबर 2009 में जम्मू कश्मीर कला,संस्कृति एवं भाषा अकैडमी में शोध सहायक के पद पर नियुक्ता हुए और जून 2017 में पदोन्नत होकर सहायक संपादक पद पर नियुक्त हुए।

आपने लेखन की शुरुआत वर्ष 1994 में की और सन 1995 में श्रीमद्भागवत पुराण को डोगरी भाषा में अनूदित किया।

सन् 1996 में आपका पहला डोगरी कविता संग्रह "अनमोल जिंदड़ी" प्रकाशित हुआ।

अब तक हिन्दी, डोगरी एवं अंग्रेजी भाषा में विभिन्न विषयों पर 25 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। आपके अनुवाद कार्य, साहित्य सृजन ,समाज सेवा,पत्रकारिता और सांस्कृतिक क्षेत्रों में अतुल्निय योगदान हेतु आपको कईं मान सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं जिनमें प्रमुख हैं:-

1. नाटक "मियां डीडो" पर वर्ष 2014 का साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली का राष्ट्रीय अनुवाद पुरस्कार।

2. पत्रकारिता भारती सम्मान (2004)

3. जम्मू कश्मीर रत्न सम्मान (2010)

4. डुग्गर प्रदेश युवा संगठन सम्मान (2011)

5. लीला देवी स्मृति सम्मान (2012)

6. महाराजा रणबीर सिंह सम्मान (2013)

7. राष्ट्रीय अनुवाद साहित्य गौरव सम्मान (निर्मला स्मृति साहित्यक समिति, चरखी दादरी एवं भारतीय अनुवाद परिषद, दिल्ली, 2017)

8. सर्व भाषा ट्रस्ट की ओर से सर्व भाषा सम्मान - 2018



आपकी चर्चित पुस्तकें हैं:-

1. अनमोल जिंदड़ी (डोगरी कविता संग्रह, 1996)

2. पैहली गैं (कविता संकलन संपादन, 2002)

3. लोक धारा (लोकवार्ता पर शोध कार्य, 2007)

4. आओ डोगरी सिखचै (Dogri Script, Phonetics and Vocabulary, 2008)

5. बस तूं गै तूं ऐं (डोगरी कविता संग्रह, 2008)

6. डोगरी व्याकरण (2009)

7. Dogri Phonetic Reader (2010)

8. मियां डीडो (अनुवाद, नाटक, 2011)

9. डोगरी भाषा ते व्याकरण (2011)

10. पिण्डी दर्शन (हिन्दी, 2012)

11. देवी पूजा विधि विधान: समाज सांस्कृतिक अध्ययन (अनुवाद, 2013)

12. बाहगे आहली लकीर (अनुवाद, संस्मरण 2014)

13. सुधीश पचौरी ने आक्खेआ हाँ (अनुवाद, कहानी संग्रह, 2015)

14. दस लेख (लेख संग्रह, 2015)

15. मनुखता दे पैहरेदार लाला जगत नारायण (अनुवाद, जीवनी, 2015)

16. घड़ी (अनुवाद, लम्बी कविता, 2015)

17. समाज-भाशाविग्यान ते डोगरी (2015)

18. साहित्य मंथन (हिन्दी आलोचना, 2016)

19. डोगरी व्याकरण ते संवाद कौशल (2016)

20. शोध ते परचोल (डोगरी आलोचना, 2016)

21. भारती इतेहास दा अध्ययन: इक परीचे (डी.डी. कोसंबी की मूल अंग्रेजी पुस्तक का डोगरी में अनुवाद, 2017)

22. गागर (लघुकथा संग्रह, प्रकाशनाधीन)





इसके इलावा सैंकड़ो लेख, कहानियां लघु कथाएं एवं कविताएँ समय समय पर राज्य एवं राष्ट्र स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित।

कई राश्टरीय स्तर की कार्यशालाओं, संगोश्ठिओं, सम्मेलनों, कवि गोश्ठिओं एवं साहित्यक कार्यक्रमों में भागीदारिता।

आप कई साहित्यक पत्रिकाओं में बतौर सम्मानित संपादक कार्यरत हैं जिनमें से प्रमुख हैं:-

1. अमर सेतु (हिन्दी)

2. डोगरी अनुसंधान (डोगरी)

3. सोच साधना(डोगरी)

4. परख पड़ताल(डोगरी)



आपको कई साहित्यक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने सम्मानित किया हुआ है जिनमें प्रमुख हैं:-

1. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति

2. राष्ट्रीय कवि संगम

3. डुग्गर मंच

4. डोगरी भाषा अकैडमी

5. डोगरी कला मंच

6. तपस्या कला संगम

7. त्रिवेणी कला कुंज

8. हिंद समाचार पत्र समूह

9. जम्मू कश्मीर अकैडमी आफ आर्ट, कल्चर एंड लैंग्वेजिज।



























































बस तूं गै तूं ऐं



खाबें च ख्यालें च

सोहें च स्यालें च

धुंधें च पालें च

नैहरें च नालें च

दुखें-कसालें च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।

अक्खियें दी जोती च

जीवन दे मोती च

पत-झड़ च ब्हारें च

बांकड़े नजारें च

सरगी झुटारें च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।

बागें बगीचें च

दिल दे दरीचें च

सप्पें दियें सूंकें च

कोयल दियें कूकें च

सूरज दी धुप्पै च

मस्सेआ दे न्हेरे गप्पै च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।

चन्नै दी चाननी च

प्रकृति दी छाननी च

तारें दी लोई च

फुल्लें दी कश्बोई च

कलियें च कलीरें च

फट्टी दी लीरें च

पीरें फकीरें च

ममता दी सीरें च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।

नैहरें दे नीरें च

हत्थें दी कलीरें च

हैंसलें तकदीरें च

रांझें च हीरें च

योद्धें च वीरें च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।

नकदी च दुहारें च

मंदरें मनारें च

मसीतें च गुरुद्वारें च

चीड़ें च चनारें च

सौन दियें फुहारें च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।

गासै दी ऊंचाई च

सागरै दी डुग्हाई च

ब्हा च पानी च

काकलें च कान्नी च

जोरें जुआन्नी च

नड़ोएं च जान्नी च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।

मन महासागर च

ज्ञान दी गागर च

भक्तें दी भक्ति च

देवतें दी शक्ति च

गीतें दे छंदें च

कविता दे बंधें च

संगीत सुरताल च

कुदरत दे कमाल च

सत्य सिन्धु च

आत्मा दे बिंदु च

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं

बस तूं गै तूं ऐं ।।











खूनै दे रिश्ते



इक्क देस हा

इक्क भेस हा

इक्क जान ही

इक्क पन्छान ही

ईद ही

देआली ही

हर थां सांझ भ्याली ही

बड़ा सोहना संसार हा

सुरगै लेखा ज्हान हा

लग्गी गेई इसगी

कुसै दी चंदरी नजर

पेई गेइयां लीकरां

लीकरें पाई ओड़े फासले

उमरें दे फासले

नेईं मिटने आह्ले फासले

बनाई ओड़े मुल्ख

बक्खरे-बक्खरे

बंडी ओड़ी धरत

बंडी ओड़ी ब्हा

बंडी ओड़ेआ पानी

बंडी ओड़ेआ शमान

बंडी ओड़ी कशबो

बंडी ओड़ेआ हिरख-प्यार

बंडी ओड़े रिश्ते-नाते

बंडी ओड़े साक सरबंधी

बंडी ओड़ी संस्कृति

सब किश बंडी टकाया

एह कुसदा ऐ कसूर…..?

कुसनै एह जुल्म कमाया…?

भ्राएं-भ्राएं च

राही ओड़े बी$

नफरत दे

दुश्मनी दे


Purchase this book or download sample versions for your ebook reader.
(Pages 1-14 show above.)